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✨ तराना (विद्यालय प्रार्थना)

इतनी शक्ति हमें देना दाता,
मन का विश्वास कमजोर हो ना।
हम चलें नेक रस्ते पे हमसे,
भूलकर भी कोई भूल हो ना॥

दूर अज्ञान के हो अँधेरे,
तू हमें ज्ञान की रौशनी दे।
हर बुराई से बचके रहें हम,
जितनी भी दे भली ज़िन्दगी दे।
बैर हो ना किसी का किसी से,
भावना मन में बदले की हो ना॥

इतनी शक्ति हमें देना दाता,
मन का विश्वास कमजोर हो ना।
हम चलें नेक रस्ते पे हमसे,
भूलकर भी कोई भूल हो ना॥

हम न सोचें हमें क्या मिला है,
हम ये सोचें किया क्या है अर्पण।
फूल खुशियों के बांटे सभी को,
सबका जीवन ही बन जाय मधुबन।
अपनी करुणा को जल तू बहा के,
करदे पावन हर एक मन का कोना॥

इतनी शक्ति हमें देना दाता,
मन का विश्वास कमजोर हो ना।
हम चलें नेक रस्ते पे हमसे,
भूलकर भी कोई भूल हो ना॥

📖 एक परिचय (संस्थान का इतिहास)

शिक्षा के क्षेत्र में यह इलाका गरीबी, लाचारी और अशिक्षा के कारण काफी पिछड़ा था। आम व्यक्तियों के बच्चे दूर-दूर तक कोई विद्यालय न होने के कारण शिक्षा ग्रहण करने से वंचित रह जाते थे तथा इन तमाम दृष्टिकोणों को ध्यान में रखते हुये बीसवीं सदी के तीसरे दशक में डुमरियागंज तहसील में स्थित कादिराबाद के प्रतिष्ठित मलिक खानदान के लोगों ने अपने मुखिया जनाब मलिक शफाअत हुसैन, आनरेरी मजिस्ट्रेट (मरहूम) के नेतृत्व में इस क्षेत्र में सन् 1940 में मकतब तथा जुलाई, 1964 में मौलाना आज़ाद जूनियर हाई स्कूल, सखावतगंज-कादिराबाद की बुनियाद डाली गयी थी।

इस नेक काम में जनाब मलिक अल्ताफ हुसैन साहब (मरहूम), जनाब मलिक मुश्ताक हुसैन साहब (मरहूम), जनाब मलिक हामिद हुसैन साहब (मरहूम), जनाब हाजी मलिक मोहम्मद यूसुफ साहब, जनाब मलिक इस्तकामत हुसैन साहब (मरहूम), काज़ी मोहम्मद अदील अब्बासी साहब (मरहूम) एवं काजी जलील अब्बासी साहब (मरहूम) के योगदान को भुलाया नही जा सकता।

सन् 1940 में मोहतरम शाह नियाज़ अहमद शाह फैज़ाबादी (मरहूम) की दुआओं के फलस्वरूप जो पौधा एक मकतब के रूप में लगाया गया था उसने परवान चढ़ कर इण्टरमीडिएट कालेज की शक्ल में आज तालीमी दुनिया में नाम रोशन कर रहा है, जहां आज लगभग 2000 छात्र/छात्रायें शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। जिसकी नयी शक्ल मौलाना आजाद पी.जी. कालेज, बायताल-कादिराबाद के रूप में इलाके में तालीमी जरूरतों को पूरा कर रहा है।

अपने पूर्वजों की इसी परम्परा को आगे बढ़ाते हुये मलिक खानदान की नयी पीढ़ी पूर्व मंत्री व विधायक जनाब मलिक मोहम्मद कमाल यूसुफ साहब के नेतृत्व में शिक्षा को आन्दोलन का रूप दे रहे हैं।

🎓 1999-2000: DDU गोरखपुर वि.वि. से सम्बद्धता (बी.ए.)।
🏛️ अध्ययन केन्द्र: जामिया मिल्लिया इस्लामिया वि.वि., नई दिल्ली।
🔬 2005-2008: B.Sc., B.Ed., M.A. एवं D.El.Ed. (B.T.C.)।
🏫 इण्टर कालेज: डॉ. राम मनोहर लोहिया (1995) व चौधरी चरण सिंह (2004)।

"वह सपना जो हमारे बुजुर्गों ने देखा था, उसे आगे बढ़ाना हमारा फर्ज भी है और इलाके का हम पर कर्ज भी है।"

— जनाब मलिक मोहम्मद कमाल यूसुफ साहब